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	<title>मार्गदर्शक</title>
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	<description>हिंदीभाषी युवाओं का कॅरियर पोर्टल</description>
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		<title>कैसे दें अच्छा इंटरव्यू: कुछ मिथक</title>
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		<pubDate>Mon, 13 Jul 2009 02:20:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator>प्रवीण</dc:creator>
				<category><![CDATA[साक्षात्कार]]></category>
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		<description><![CDATA[किसी भी नौकरी, चाहे वह निजी क्षेत्र में हो या सरकारी क्षेत्र में, उसकी चयन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग होता है साक्षात्कार (इंटरव्यू).  अधिकांश युवा कुशाग्र बुद्धि होते हुए भी साक्षात्कार में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, जिसकी एक वजह है साक्षात्कार से जुड़े कई मिथक. आज हम ऐसे ही कुछ मिथकों और भ्रमों को दूर करने का प्रयास करेंगे.<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=margdarshak.wordpress.com&amp;blog=3315479&amp;post=10&amp;subd=margdarshak&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसी भी नौकरी, चाहे वह निजी क्षेत्र में हो या सरकारी क्षेत्र में, उसकी चयन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग होता है साक्षात्कार (इंटरव्यू).  अधिकांश युवा कुशाग्र बुद्धि होते हुए भी साक्षात्कार में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, जिसकी एक वजह है साक्षात्कार से जुड़े कई मिथक. आज हम ऐसे ही कुछ मिथकों और भ्रमों को दूर करने का प्रयास करेंगे.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 1: </strong></span>हमेशा सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का ही चयन होता है</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> एक आदर्श विश्व में ऐसा होना चाहिये, पर व्यावहारिक जगत में ऐसा नहीं होता. सत्य तो यह है कि चयन उसका नहीं होता जो  उस पद के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार था, बल्कि उस का होता है जिसने साक्षात्कार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अत: ध्यान दें कि:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>किसी पद के लिए आवेदन करना सिर्फ़ इसलिए न छोड़ें क्योंकि आपसे अधिक योग्य कोई व्यक्ति भी उस पद के लिए आवेदन कर रहा है. यदि आपने पूरे मनोयोग से तैयारी की हो तो काफ़ी उम्मीद है कि आपको ही चयनित किया जाए, विशेषत: अगर उस व्यक्ति ने साक्षात्कार को हल्के में लिया और पूरी तैयारी नहीं की.</li>
<li>यदि आपको पता है कि आप इस पद के लिए योग्यतम उम्मीदवार हैं तो भी अति-आत्मविश्वास में न आयें. तैयारी पर पूरा समय दें. हो सकता है कि आपके पास उस क्षेत्र में काफ़ी अनुभव हो, पर ज़रूरी है कि आप उस अनुभव को साक्षात्कार के दौरान भली प्रकार सामने रख पाएँ.</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 2: </strong></span></strong><strong>साक्षात्कार स्कूल परीक्षा की भाँति होते हैं, उत्तर जितना लम्बा हो उतना ही अच्छा</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> स्कूल परीक्षा और साक्षात्कार में सिर्फ़ इतनी ही समानता है कि दोनो जगह आपसे कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं और आपको उनके उचित उत्तर देने होते हैं. पर इसके अलावा साक्षात्कार किसी स्कूल परीक्षा से कम और एक आम बातचीत से ज़्यादा मिलते-जुलते हैं. अत: अत्यधिक लम्बे उत्तर  बातचीत की दिशा को भटका सकते हैं. कितनी देर बोल कर कहाँ रुकना है, यह एक कला है जो हर व्यक्ति को सीखनी चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, स्कूल परीक्षा के विपरीत साक्षात्कार में कई प्रश्नों के कोई निश्चित सही या ग़लत उत्तर नहीं होते, बल्कि उन्हें प्रतियोगी की पृष्ठभूमि और विचारधारा को समझने के लिए पूछा जाता है. अत: ज़रूरी यह है कि आप अपने अतीत और वर्तमान के सभी निर्णयों को युक्तिसंगत ठहरा सकें और अपनी उपलब्धियों के बारे में विश्वासपूर्वक बात कर सकें.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 3: </strong></span>इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति एक आदर्श </strong><strong>साक्षात्कारकर्ता है</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> कुछ साक्षात्कारकर्ता अपने कार्य में निपुण होते हैं. परन्तु कुछ मैनेजर और छोटे व्यवसायों के मालिक उतने अच्छे साक्षात्कारकर्ता नहीं होते, विशेषत: क्योंकि इंटरव्यू लेना उनकी दिनचर्या का अंग नहीं है और उनका स्वयं का इंटरव्यू लेने का अनुभव अत्यंत सीमित है. एक बुरे साक्षात्कारकर्ता के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>ज़्यादातर समय वे स्वयं बोलते रहते हैं.</li>
<li>वे ऐसा दिखाते हैं जैसे पहले 5 मिनट में ही उन्होने आपके बारे में अपनी राय बना ली हो.</li>
<li>वे अपने प्रश्न किसी भी बेतुके क्रम में पूछते हैं.</li>
<li>बीच में उनका फ़ोन बजता रहता है, और वे फ़ोन उठा भी लेते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">जबकि एक अच्छे साक्षात्कारकर्ता की पहचान इन बातों से होती है:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>उनके प्रश्न एक सधे हुए निश्चित क्रम में होते हैं.</li>
<li>वे आपकी उपलब्धियों, आपके अनुभव और आपके काम के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते हैं.</li>
<li>वे ज़्यादा से ज़्यादा समय आपको बोलने देते हैं.</li>
<li>यदि आप नर्वस हैं तो वे आपको सामान्य करने का प्रयास करते हैं.</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">अनुभवहीन साक्षात्कारकर्ता अक्सर आपको ऐसे प्रश्नों में उलझाए रखते हैं जिनका उस नौकरी से कोई सम्बंध नहीं है. इस स्थिति में उसके सही प्रश्न पूछने का इंतज़ार न करें और विनम्रता पूर्वक स्वयं ही अपनी उपलब्धियों, अपने काम के बारे में बताना शुरू कर दें. पर कई बार यह भी संभव नहीं हो पाता क्योंकि साक्षात्कारकर्ता आपको बोलने का मौका ही नहीं देता. यदि ऐसा हो तो घबराएं नहीं, याद रखें कि आपका लक्ष्य सभी प्रश्नों के सही उत्तर देना नहीं, बल्कि साक्षात्कारकर्ता के मन पर एक अच्छी छाप छोड़ना है. सो आप सर हिलाते रहें, मुस्कुराते रहें, उनकी बातों को रुचिपूर्वक सुनें. बातूनी लोगों को आम तौर पर ऐसे लोग पसंद होते हैं जो उनकी बातें सुनें और उनसे सहमति दिखायें.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 4: </strong></span>कभी नहीं बोलना चाहिए कि &#8220;मैं नहीं जानता&#8221;</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> बहुत से लोग हर प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करते हैं, चाहे उन्हें उत्तर पता हो या न हो. ज़ाहिर है कि एक आदर्श इंटरव्यू तो वही होता है जिसमें आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे पाएँ, फिर भी, यदि आपको किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पता तो अच्छा यही होगा कि आप ईमानदारी से यह बात स्वीकार कर लें, बजाए साक्षात्कारकर्ता को को चकमा देने का प्रयास करने के. ज़्यादातर साक्षात्कारकर्ता ऐसे प्रयास को दूर से ही पहचान लेते हैं और इसका अर्थ वे यह लगाते हैं कि न तो आपकी जानकारी अच्छी है, न ही आप ईमानदार हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">इसका अर्थ यह नहीं है कि अनिश्चितता की स्थिति में आप उत्तर देने का प्रयास ही न करें. प्रयास करने में कोई हानि नहीं है, बशर्ते आप साक्षात्कारकर्ता को अपनी अनिश्चितता से अवगत करा दें. आपका उत्तर इस प्रकार हो सकता है: &#8220;मैं पूरी ईमानदारी से स्वीकार करता हूँ कि इस क्षेत्र में अभी मुझे अधिक ज्ञान नहीं है, यद्यपि मैं इसके बारे में सीखना अवश्य चाहता हूँ. फिर भी यदि आप चाहें, तो जितनी मेरी जानकारी है, उसके आधार पर उत्तर देने का प्रयास कर सकता हूँ.&#8221;</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 5: </strong></span>सुन्दर लोगों को आसानी से नौकरी मिल जाती है</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> यदि साक्षात्कार किसी अभिनेता अथवा मॉडल के लिए है तो आपका सुंदर दिखना नि:संदेह फ़ायदेमंद होगा, पर इसके अलावा ज़्यादातर अन्य नौकरियों के लिए सुन्दरता इतना बड़ा मुद्दा नहीं होता है, जितना कुछ लोग इसे समझते हैं. आज-कल अधिकांश व्यापार अपने क्षेत्र में इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा झेल रहे हैं और उनके मालिकों को भी पता है कि एक ग़लत आदमी को नौकरी देने का कितना बड़ा ख़ामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ सकता है.</p>
<p style="text-align:justify;">पर इसका अर्थ यह नहीं है कि आपके पहनावे और व्यक्तित्व का साक्षात्कार में कोई महत्व नहीं है. यह बहुत ज़रूरी है कि आप शालीन कपड़े पहने हों और ख़ुशमिजाज़ दिखें, पर हाँ, अपनी सुन्दरता को ले कर किसी तरह का भ्रम न पालें.</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:#0000ff;"><strong>मिथक 6: </strong></span>साक्षात्कारकर्ता जान-बूझ कर आपमें कमियाँ निकालता है</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#0000ff;"><strong>वास्तविकता:</strong></span> साक्षात्कारकर्ता का काम सिर्फ़ आपकी कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को जानना और परखना है. बहुत से प्रतियोगी इसी भ्रम के कारण शुरू से ही रक्षात्मक रवैया अपना लेते हैं और खुल कर प्रश्नों के जवाब नहीं दे पाते.</p>
<p style="text-align:justify;">यह बहुत ज़रूरी है कि आप प्रश्नों से डरें नहीं, बल्कि उन्हें खुद को साबित करने के एक मौके के रूप में देखें. उन प्रश्नों के उत्तर दे कर ही आप दिखा पाएंगे कि आप कितने योग्य हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">
<p style="text-align:justify;">
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		<title>एनीमेशन में अवसर</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Aug 2008 09:40:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>प्रवीण</dc:creator>
				<category><![CDATA[कम्प्यूटर]]></category>
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		<description><![CDATA[हाल के कुछ वर्षों में एनीमेशन करियर के लिए हॉट क्षेत्र बनकर उभरा है. आने वाले दिनों में भारत में बीपीओ की तरह ही एनीमेशन सेंटर का विकास हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. हॉलीवुड के बहुत से प्रोडक्शन हाउस एनीमेशन तकनीक के लिए भारत में अपने सेंटर स्थापित करना चाहते हैं. डिज़्नी पिक्चर्स, कार्टून [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=margdarshak.wordpress.com&amp;blog=3315479&amp;post=7&amp;subd=margdarshak&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हाल के कुछ वर्षों में एनीमेशन करियर के लिए हॉट क्षेत्र बनकर उभरा है. आने वाले दिनों में भारत में बीपीओ की तरह ही एनीमेशन सेंटर का विकास हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. हॉलीवुड के बहुत से प्रोडक्शन हाउस एनीमेशन तकनीक के लिए भारत में अपने सेंटर स्थापित करना चाहते हैं. डिज़्नी पिक्चर्स, कार्टून नेटवर्क, निकेलोडियोन, रेनबो, जॉनकेडे और नेप्टूनो स्पेन अपने मल्टीमीडिया प्रोडक्शन के लिए भारत में अपने सेंटर स्थापित करना चाहते हैं.</p>
<p>अभी तक फिल्म और टेलीविजन का क्षेत्र ही एनीमेशन के लिए सबसे बड़ा माना जाता रहा है, लेकिन इसका उपयोग एजुकेशन, पब्लिशिंग, टूरिज़्म, रक्षा, इंजीनियरिंग, मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, इंटीरियर, वेब डिज़ाइनिंग, फैशन डिज़ाइनिंग जैसे कई क्षेत्रों में भी होना शुरू हो गया है. नासकॉम के अनुसार वर्तमान में एनीमेशन का बाजार 1500 करोड़ रूपए वार्षिक का है, लेकिन अगले दो वर्षों में आंकड़ा कई गुना होने की उम्मीद है.</p>
<p>एनीमेशन उद्योग में जिस तेजी से विकास हो रहा है, उस तेजी से उतने प्रशिक्षित एनीमेटर नहीं मिल रहे हैं. देश में 50 हजार प्रशिक्षित एनीमेटर्स की जरूरत है, जबकि वर्तमान में 10 हजार एनीमेटर ही उपलब्द्ध हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फिल्मों की बजाय मेडिकल क्षेत्रों में अघिक एनीमेटर्स की जरूरत होगी. ताजा आकलन के अनुसार अगले दो वर्षो में भारतीय एनीमेशन उद्योग को दो लाख एनीमेटर्स की जरूरत होगी.</p>
<p>पाठयक्रम — एनीमेशन में मुख्यरूप से 2-डी और 3-डी प्रमुख कोर्स हैं. इसमें प्रमुख रूप से 3-डी स्टूडियो मैक्स, साफ़्ट इमेज, माया, आफ्टर इफेक्ट, और एडोबी साफ्टवेयर की ट्रेनिंग दी जाती है. ग्राफिक्स डिज़ाइनिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग, गेम डिज़ाइनिंग, स्टोरी बोर्ड तथा सिनेमेटोग्राफी में भी प्रशिक्षित होना पड़ता है. एनीमेशन में आमतौर पर बहुत से संस्थान 6 से 18 माह तक के डिप्लोमा कोर्स करवाते हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी मुंबई और नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ अहमदाबाद ने स्त्रातक स्तर के पाठयक्रम शुरू किए हैं.</p>
<p>न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता — एनीमेशन कोर्स में एडमिशन लेने के लिए हायर सेकंडरी परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए. ड्राइंग और स्केचिंग में भी रूचि हो. कुछ संस्थान विशेष विषयों के साथ स्नातक की भी मांग करते हैं.</p>
<p>महत्वपूर्ण प्रशिक्षण संस्थान — देश में काफी संस्थान हैं, जो एनीमेशन का प्रशीक्षण देते हैं. इन संस्थानों में प्रमुख हैं:<br />
- नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ डिज़ाइन, अहमदाबाद<br />
- इंडस्ट्रीयल डिज़ाइन सेंटर एनीमेशन, आई.आई.टी. मुंबई<br />
- आई.आई.टी. गुवाहाटी<br />
- नेशनल मल्टीमीडिया रिसोर्स सेंटर, सी-डेक, पुणे</p>
<p>आमदनी — एनीमेशन के क्षेत्र में कुशल प्रोफेशनल लोगों की बढ़ती मांग से वेतन भी अच्छा मिलता है. प्रारंभिक तौर पर 7 से 15 हजार रूपए आराम से मिल जाते हैं. लेकिन कार्य का अनुभव होने पर एनीमेटर को 25 से 40 हजार रूपए प्रतिमाह मिलना आसान होता है. लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि आप में कुशलता और सृजनात्मक कल्पना शक्ति हो.</p>
<br /><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/categories/margdarshak.wordpress.com/7/" /> <img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/tags/margdarshak.wordpress.com/7/" /> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gocomments/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/comments/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godelicious/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/delicious/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gofacebook/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/facebook/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gotwitter/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/twitter/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/gostumble/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/stumble/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/godigg/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/digg/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <a rel="nofollow" href="http://feeds.wordpress.com/1.0/goreddit/margdarshak.wordpress.com/7/"><img alt="" border="0" src="http://feeds.wordpress.com/1.0/reddit/margdarshak.wordpress.com/7/" /></a> <img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=margdarshak.wordpress.com&amp;blog=3315479&amp;post=7&amp;subd=margdarshak&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></content:encoded>
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	</item>
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		<title>पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा</title>
		<link>http://margdarshak.wordpress.com/2008/04/24/papa/</link>
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		<pubDate>Thu, 24 Apr 2008 14:12:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>प्रवीण</dc:creator>
				<category><![CDATA[कॅरियर चुनाव]]></category>
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		<category><![CDATA[future]]></category>
		<category><![CDATA[job selection]]></category>

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		<description><![CDATA[कैसे चुनें सही कॅरियर? कॅरियर का चयन किसी के भी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक होता है, और फिर भी हम में से कई लोग इस निर्णय को या तो नियति के सहारे छोड़ देते हैं, या अपने अभिभावकों के. आइये देखें कि हम किस प्रकार अपने लिये सही कॅरियर का चयन [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=margdarshak.wordpress.com&amp;blog=3315479&amp;post=6&amp;subd=margdarshak&amp;ref=&amp;feed=1" width="1" height="1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कैसे चुनें सही कॅरियर?</strong></p>
<p>कॅरियर का चयन किसी के भी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक होता है, और फिर भी हम में से कई लोग इस निर्णय को या तो नियति के सहारे छोड़ देते हैं, या अपने अभिभावकों के. आइये देखें कि हम किस प्रकार अपने लिये सही कॅरियर का चयन स्वयं कर सकते हैं और भविष्य में आने वाले तमाम तनावों, पश्चाताप और &#8216;काश, मैंने ऐसा किया होता&#8217; जैसे विचारों से बच सकते हैं.</p>
<p>हमारे कॅरियर के चयन में हमारे माता-पिता की बहुत अहम भूमिका होती है. कई बार तो इतनी अहम कि हमारी अपनी राय भी उसके आगे कोई मायने नहीं रखती. अभिभावकों को लगता है कि आख़िर यह फ़ैसला उनके बच्चे के जीवन की दिशा तय करने वाला है, तो ऐसे कैसे इतना अहम फ़ैसला अपने नन्हे-मुन्ने के हाथों में छोड़ दें? पर उन्हें इसी बात के दूसरे पहलू पर सोचना चाहिए: यह फ़ैसला उनके बच्चे के जीवन की दिशा तय करने वाला है, तो क्यों न इतना अहम फ़ैसला उसी को करने दें जिसके जीवन का निर्धारण इससे होना है? और माफ़ कीजिएगा, आपका नन्हा-मुन्ना अब वास्तव में इतना छोटा नहीं है जितना वो आपको लगता है.</p>
<p>मेरे एक मित्र के जीवन की त्रासदी यही है. उसकी माताजी चाहती थीं कि वह डॉक्टर बने, जबकि पिताजी की इच्छा थी कि वह सिविल सेवा में जाए. इस बात को लेकर अक्सर माता-पिता में भी विवाद रहता, और वह बेचारा, इस विवाद में पिसता हुआ, जब मम्मी सामने होतीं तो मेडिकल प्रवेश परीक्षा की किताबें खोल कर बैठ जाता और जब पापा आते तो मेडिकल की किताबें छुपा कर सिविल सेवा की किताबें निकाल लेता. इस प्रकार इन दोनो परीक्षाओं की तैयारी का नाटक करते हुए उसने अपने जीवन के 3 वर्ष बर्बाद किये, पर इस बीच किसी ने उससे यह नहीं पूछा कि वह स्वयं क्या चाहता है.</p>
<p>ऐसा नहीं है कि हमेशा इसके लिये माता-पिता ही दोषी हों. कई बार बच्चे स्वयं अपने जीवन की बागडोर माता-पिता के हाथ में सौंप देते हैं, सिर्फ़ इसलिये क्योंकि स्वयं निर्णय करने पर उसके परिणाम की ज़िम्मेदारी भी स्वयं उठानी पड़ेगी. यदि निर्णय माता-पिता पर छोड़ दिया तो असफल रहने पर कोई तो होगा जिसके सर पर सारा दोष मढ़ा जा सके. पर सोचने वाली बात यह है कि क्या किसी और के सर दोष मढ़ देने से आपकी असफलता दूर हो जाएगी? क्या आप एक निष्फल, निर्धन और कुंठित जीवन जीने से बच जाएंगे? तो क्यों न उस क्षेत्र में जाने की बजाए जहाँ दोष देने के लिये तो कोई और है पर असफलता की उम्मीद भी अधिक है, उस क्षेत्र में जाया जाए जहाँ सारी ज़िम्मेदारी (दोष अथवा श्रेय) आपकी स्वयं की है, पर सफलता की उम्मीद भी अधिक है (क्योंकि वह आपकी पसंद का क्षेत्र है)?</p>
<p>मेरे एक अन्य मित्र, जो कि इंजीनियर बनना चाहते थे, ने अचानक एक दिन अपना फ़ैसला बदलते हुए मुझे बताया कि अब वह इंजीनियर नहीं बल्कि वही बनेंगे जो उनके पिताजी उन्हें बनाना चाहते हैं. यह पूछने पर कि पिताजी क्या चाहते हैं, पता चला कि पिताजी ने अभी कुछ सोचा ही नही है, पर इतना तय है कि पिताजी जो भी तय करेंगे, बेटा वही बनने की कोशिश करेगा. निर्णय पिताजी के ऊपर छोड़ने के पीछे बेटे का तर्क यह था कि &#8220;पिताजी के पास जीवन का लम्बा अनुभव है, इसलिये वह सही फ़ैसला कर सकते हैं कि मेरे लिये क्या अच्छा है&#8221;. किसी के लिये भी कौन सा कॅरियर सही है, इसके पीछे सबसे बड़ा कारक होता है कि उस व्यक्ति के अंदर कौन सी ख़ूबियाँ और ख़ामियाँ हैं, और क्या ये ख़ूबियाँ उस कॅरियर के लिये आवश्यक योग्यताओं से मेल खाती हैं. यह ठीक है कि अभिभावकों के पास जीवन का आपसे लम्बा अनुभव है, पर आपकी कमियों और ख़ूबियों को सबसे बेहतर आप स्वयं जानते हैं, इसलिये अच्छा होगा कि अपने कॅरियर का चयन आप स्वयं करें. हाँ, माता-पिता और अन्य अभिभावकों से उनकी राय लेने में कोई बुराई नहीं है, पर अंतिम निर्णय स्वयं आपका होना चाहिए.</p>
<p>इस सम्बंध में दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह निर्णय जितनी जल्दी हो जाए, उतना अच्छा होता है. &#8216;अभी जैसे चल रहा है, चलने दो, तब की तब देखेंगे&#8217; वाला रवैया अंत में बेहद महंगा साबित होता है. अंत तक यदि कुछ हासिल नहीं हुआ तो इंसान हताशा की स्थिति में अक्सर ग़लत निर्णय ले लेता है. जितनी जल्दी आप अपनी दिशा चुन लेंगे, उतना अधिक समय आपको उस क्षेत्र विशेष से सम्बंधित तैयारी करने का मिल जायेगा. इसके अलावा यदि कुछ समय बाद आपको लगे कि शायद आपने ग़लत क्षेत्र चुन लिया है, तो अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिये भी आपके पास पर्याप्त समय होगा.</p>
<p>यह देखने के पश्चात कि कॅरियर चयन का निर्णय किसके द्वारा हो और कब हो, चलिये अब इस पर विचार करते हैं कि सही क्षेत्र का चयन कैसे करें. अंग्रेज़ी के एक विद्वान ने अपना आदर्श क्षेत्र चुनने का एक बहुत ही सरल और सटीक उपाय बताया है. उनके अनुसार</p>
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<li>सबसे पहले यह तय करो कि कौन सा काम करने में तुम्हें सबसे ज़्यादा मज़ा आता है.</li>
<li>कोई ऐसा आदमी ढूंढो जो तुम्हे वही काम करने के लिये पैसे देने पर तैयार हो.</li>
</ol>
<p>पहली नज़र में यह तरीक़ा बड़ा अजीब सा लगता है. ज़्यादातर लोग कहेंगे कि मुझे तो ऐसे काम पसंद हैं जिनके बदले कोई मुझे पैसे नहीं देगा. मसलन मुझे ख़ूब बातें करना पसंद है, या मुझे तो घूमना पसंद है. अब कोई भी समझदार इंसान मुझे भला बातें करने के लिये पैसे क्यों देगा? मगर जी नहीं, ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं, जिनमें जाने के लिये सबसे अहम योग्यता सिर्फ़ आपका बातूनी होना है, जैसे रेडियो जॉकी, कॉल सेंटर आदि. इन सबमें अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि ये क्षेत्र भारत में अभी तेज़ी से बढ़ रहे हैं और इनमें योग्य लोगों की काफ़ी कमी है. इसी प्रकार यदि आपको वास्तव में घूमने का शौक है तो पर्यटन, मार्केटिंग आदि कई क्षेत्र हैं जो आपको लगातार भ्रमण पर रहने का मौक़ा देते हैं और साथ ही भ्रमण के दौरान अतिरिक्त भत्ता भी देते हैं.</p>
<p>एक दिन एक सज्जन मेरे पास आए और बोले, &#8220;यार, मैंने तुम्हारे कॅरियर चयन वाले तरीके के बारे में सुना, पर मुझे नहीं लगता कि वह सबके ऊपर सही बैठेगा. अब जैसे मुझे चाय पीने की बड़ी लत है. क्या तुम्हे लगता है कि कोई मुझे चाय पीने की नौकरी पर रख सकता है?&#8221; जब मैंने उन्हें टी-टेस्टर की नौकरी के बारे में बताया तो वह अवाक रह गए.</p>
<p>इसलिए आपकी पसंद का काम पहली नज़र में चाहे जितना भी अजीब लगे, यदि आप वाकई उसको लेकर गम्भीर हैं और उसमें अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं तो जानकारी जुटाइए, कोई न कोई क्षेत्र ऐसा ज़रूर निकल आएगा जो आपको वही काम (अथवा उससे मिलते-जुलते काम) करने का मौका देता हो. हो सकता है कि उस क्षेत्र में आपको उतना पैसा न मिले जितना पारम्परिक क्षेत्र आपको शायद दे देते, पर चूंकि वह आपकी पसंद का क्षेत्र है, उसमें मिलने वाली संतुष्टि (job satisfaction) आपको निश्चय ही उस क्षेत्र की बुलंदियों तक ले जाएगी.</p>
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