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कैसे दें अच्छा इंटरव्यू: कुछ मिथक जुलाई 13, 2009

Posted by Pravin in साक्षात्कार.
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किसी भी नौकरी, चाहे वह निजी क्षेत्र में हो या सरकारी क्षेत्र में, उसकी चयन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग होता है साक्षात्कार (इंटरव्यू).  अधिकांश युवा कुशाग्र बुद्धि होते हुए भी साक्षात्कार में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते, जिसकी एक वजह है साक्षात्कार से जुड़े कई मिथक. आज हम ऐसे ही कुछ मिथकों और भ्रमों को दूर करने का प्रयास करेंगे.

मिथक 1: हमेशा सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का ही चयन होता है

वास्तविकता: एक आदर्श विश्व में ऐसा होना चाहिये, पर व्यावहारिक जगत में ऐसा नहीं होता. सत्य तो यह है कि चयन उसका नहीं होता जो  उस पद के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार था, बल्कि उस का होता है जिसने साक्षात्कार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अत: ध्यान दें कि:

  • किसी पद के लिए आवेदन करना सिर्फ़ इसलिए न छोड़ें क्योंकि आपसे अधिक योग्य कोई व्यक्ति भी उस पद के लिए आवेदन कर रहा है. यदि आपने पूरे मनोयोग से तैयारी की हो तो काफ़ी उम्मीद है कि आपको ही चयनित किया जाए, विशेषत: अगर उस व्यक्ति ने साक्षात्कार को हल्के में लिया और पूरी तैयारी नहीं की.
  • यदि आपको पता है कि आप इस पद के लिए योग्यतम उम्मीदवार हैं तो भी अति-आत्मविश्वास में न आयें. तैयारी पर पूरा समय दें. हो सकता है कि आपके पास उस क्षेत्र में काफ़ी अनुभव हो, पर ज़रूरी है कि आप उस अनुभव को साक्षात्कार के दौरान भली प्रकार सामने रख पाएँ.

मिथक 2: साक्षात्कार स्कूल परीक्षा की भाँति होते हैं, उत्तर जितना लम्बा हो उतना ही अच्छा

वास्तविकता: स्कूल परीक्षा और साक्षात्कार में सिर्फ़ इतनी ही समानता है कि दोनो जगह आपसे कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं और आपको उनके उचित उत्तर देने होते हैं. पर इसके अलावा साक्षात्कार किसी स्कूल परीक्षा से कम और एक आम बातचीत से ज़्यादा मिलते-जुलते हैं. अत: अत्यधिक लम्बे उत्तर  बातचीत की दिशा को भटका सकते हैं. कितनी देर बोल कर कहाँ रुकना है, यह एक कला है जो हर व्यक्ति को सीखनी चाहिए.

साथ ही, स्कूल परीक्षा के विपरीत साक्षात्कार में कई प्रश्नों के कोई निश्चित सही या ग़लत उत्तर नहीं होते, बल्कि उन्हें प्रतियोगी की पृष्ठभूमि और विचारधारा को समझने के लिए पूछा जाता है. अत: ज़रूरी यह है कि आप अपने अतीत और वर्तमान के सभी निर्णयों को युक्तिसंगत ठहरा सकें और अपनी उपलब्धियों के बारे में विश्वासपूर्वक बात कर सकें.

मिथक 3: इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति एक आदर्श साक्षात्कारकर्ता है

वास्तविकता: कुछ साक्षात्कारकर्ता अपने कार्य में निपुण होते हैं. परन्तु कुछ मैनेजर और छोटे व्यवसायों के मालिक उतने अच्छे साक्षात्कारकर्ता नहीं होते, विशेषत: क्योंकि इंटरव्यू लेना उनकी दिनचर्या का अंग नहीं है और उनका स्वयं का इंटरव्यू लेने का अनुभव अत्यंत सीमित है. एक बुरे साक्षात्कारकर्ता के कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:

  • ज़्यादातर समय वे स्वयं बोलते रहते हैं.
  • वे ऐसा दिखाते हैं जैसे पहले 5 मिनट में ही उन्होने आपके बारे में अपनी राय बना ली हो.
  • वे अपने प्रश्न किसी भी बेतुके क्रम में पूछते हैं.
  • बीच में उनका फ़ोन बजता रहता है, और वे फ़ोन उठा भी लेते हैं.

जबकि एक अच्छे साक्षात्कारकर्ता की पहचान इन बातों से होती है:

  • उनके प्रश्न एक सधे हुए निश्चित क्रम में होते हैं.
  • वे आपकी उपलब्धियों, आपके अनुभव और आपके काम के बारे में अधिक से अधिक जानना चाहते हैं.
  • वे ज़्यादा से ज़्यादा समय आपको बोलने देते हैं.
  • यदि आप नर्वस हैं तो वे आपको सामान्य करने का प्रयास करते हैं.

अनुभवहीन साक्षात्कारकर्ता अक्सर आपको ऐसे प्रश्नों में उलझाए रखते हैं जिनका उस नौकरी से कोई सम्बंध नहीं है. इस स्थिति में उसके सही प्रश्न पूछने का इंतज़ार न करें और विनम्रता पूर्वक स्वयं ही अपनी उपलब्धियों, अपने काम के बारे में बताना शुरू कर दें. पर कई बार यह भी संभव नहीं हो पाता क्योंकि साक्षात्कारकर्ता आपको बोलने का मौका ही नहीं देता. यदि ऐसा हो तो घबराएं नहीं, याद रखें कि आपका लक्ष्य सभी प्रश्नों के सही उत्तर देना नहीं, बल्कि साक्षात्कारकर्ता के मन पर एक अच्छी छाप छोड़ना है. सो आप सर हिलाते रहें, मुस्कुराते रहें, उनकी बातों को रुचिपूर्वक सुनें. बातूनी लोगों को आम तौर पर ऐसे लोग पसंद होते हैं जो उनकी बातें सुनें और उनसे सहमति दिखायें.

मिथक 4: कभी नहीं बोलना चाहिए कि “मैं नहीं जानता”

वास्तविकता: बहुत से लोग हर प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास करते हैं, चाहे उन्हें उत्तर पता हो या न हो. ज़ाहिर है कि एक आदर्श इंटरव्यू तो वही होता है जिसमें आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे पाएँ, फिर भी, यदि आपको किसी प्रश्न का उत्तर नहीं पता तो अच्छा यही होगा कि आप ईमानदारी से यह बात स्वीकार कर लें, बजाए साक्षात्कारकर्ता को को चकमा देने का प्रयास करने के. ज़्यादातर साक्षात्कारकर्ता ऐसे प्रयास को दूर से ही पहचान लेते हैं और इसका अर्थ वे यह लगाते हैं कि न तो आपकी जानकारी अच्छी है, न ही आप ईमानदार हैं.

इसका अर्थ यह नहीं है कि अनिश्चितता की स्थिति में आप उत्तर देने का प्रयास ही न करें. प्रयास करने में कोई हानि नहीं है, बशर्ते आप साक्षात्कारकर्ता को अपनी अनिश्चितता से अवगत करा दें. आपका उत्तर इस प्रकार हो सकता है: “मैं पूरी ईमानदारी से स्वीकार करता हूँ कि इस क्षेत्र में अभी मुझे अधिक ज्ञान नहीं है, यद्यपि मैं इसके बारे में सीखना अवश्य चाहता हूँ. फिर भी यदि आप चाहें, तो जितनी मेरी जानकारी है, उसके आधार पर उत्तर देने का प्रयास कर सकता हूँ.”

मिथक 5: सुन्दर लोगों को आसानी से नौकरी मिल जाती है

वास्तविकता: यदि साक्षात्कार किसी अभिनेता अथवा मॉडल के लिए है तो आपका सुंदर दिखना नि:संदेह फ़ायदेमंद होगा, पर इसके अलावा ज़्यादातर अन्य नौकरियों के लिए सुन्दरता इतना बड़ा मुद्दा नहीं होता है, जितना कुछ लोग इसे समझते हैं. आज-कल अधिकांश व्यापार अपने क्षेत्र में इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा झेल रहे हैं और उनके मालिकों को भी पता है कि एक ग़लत आदमी को नौकरी देने का कितना बड़ा ख़ामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ सकता है.

पर इसका अर्थ यह नहीं है कि आपके पहनावे और व्यक्तित्व का साक्षात्कार में कोई महत्व नहीं है. यह बहुत ज़रूरी है कि आप शालीन कपड़े पहने हों और ख़ुशमिजाज़ दिखें, पर हाँ, अपनी सुन्दरता को ले कर किसी तरह का भ्रम न पालें.

मिथक 6: साक्षात्कारकर्ता जान-बूझ कर आपमें कमियाँ निकालता है

वास्तविकता: साक्षात्कारकर्ता का काम सिर्फ़ आपकी कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को जानना और परखना है. बहुत से प्रतियोगी इसी भ्रम के कारण शुरू से ही रक्षात्मक रवैया अपना लेते हैं और खुल कर प्रश्नों के जवाब नहीं दे पाते.

यह बहुत ज़रूरी है कि आप प्रश्नों से डरें नहीं, बल्कि उन्हें खुद को साबित करने के एक मौके के रूप में देखें. उन प्रश्नों के उत्तर दे कर ही आप दिखा पाएंगे कि आप कितने योग्य हैं.